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Darvin Justice: Bihar, Naksal aur Prem

Darvin Justice: Bihar, Naksal aur Prem
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Tags: Darvin Justice: Bihar, Naksal aur Prem

बिहार के इतिहास को, बुद्ध और महावीर के शांति सन्देशों के अलावा, सामाजिक संरचना में डार्विन जस्टिस की थ्योरी को भी समझना था। सामाजिक संरचना में सदियों से चला आ रहा असंतुलन, संतुलित होने के नाम पर रक्तरंजित होने जा रहा था। तैयारियाँ शुरू हो गर्इं। लोग दूर-दराज़ से आने लगे। जिन्हें अपने खेतों से झंडे उखड़वाने थे, वे मनचाहा योगदान देने को तैयार थे। अनय और चश्मिश की कहानी, काल के किसी कार्यक्रम का हिस्सा है; किसी इंसान के बहाने इंसानियत को कंलकित करना है। उसे कार्ल माक्र्स के अंदर डार्विन के सिद्धान्त को समझाना है। उसे समझाना है कि, न्यूटन का सिद्धान्त सिर्फ भौतिक विज्ञान की किताबों में ही नहीं है, बल्कि वह सामाजिक संरचना के अंदर भी घुसा हुआ है; उसे समझाना है कि, लिंकन के जिस प्रजातंत्र का हम दम्भ भरते हैं, वहाँ भी डार्विन की थ्योरी चुपचाप अपना काम करती रहती है।


About the Author

बिहार के ग्रामीण परिवेश में पले-बढ़े प्रवीण कुमार का जन्म राजगीर और नालन्दा के मध्य स्थित सिलाव के पास कड़ाहडीह नामक ग्राम में हुआ, लेकिन बचपन बिहार शरीफ से ढाई-तीन किलोमीटर पश्चिम मघड़ा ग्राम में बीता। कॉलेज की शिक्षा बिहारशरीफ स्थित नालंदा कॉलेज से हुई। प्रवीण बचपन में कई सालों तक नंदन के पाठक रहे, तब इन्हें चाचा चौधरी और साबू भी पसंद थे; कॉलेज पहुँचने बाद यही पाठकीय रुचि प्रेमचंद साहित्य से होते हुए फणीश्वरनाथ रेणु के 'मैला आँचल' तक पहुँची। यह साहित्यिक रुचि कभी-कभी कविताओं का आँगन भी निहार आती थीं जिसका सुखद परिणाम 2016 में “कहीं तो हो तुम” कवितासंग्रह के रूप में आया। डार्विन जस्टिस इनकी दूसरी किताब और पहला उपन्यास है।


book
pages 440
Author Pravin kumar
Language hindi
Binding paperback
Brand Anjuman prakashan

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